माँ मुझको अब जाने दो
न रोओ
न हो उदास,
न आंखों में
आँसू आने दो,
माँ मुझको अब जाने दो।
कब तक आँचल में रहूँ मैं,
कब तक अंगुली को गहूँ मैं।
स्वप्नों का डैना वृहद उगाना है,
दूर व्योम में उड़कर जाना है।
इस पक्षी पथिक को
लक्ष्य अपना पाने दो,
माँ मुझको अब जाने दो।
तब तक न सुस्ताना है,
न ही कोई बहाना है।
खेत में बोया जो दाना,
फसल लाने को है ठाना।
सफल कृषक
कहाने दो,
माँ मुझको अब जाने दो।
मेरा सब कार्य होगा तब,
उसका उपकार होगा जब।
मेहनत हो जायेगी साकार,
खूब भर जाएगी बखार।
उसके दर पर
शीश झुकाने दो,
माँ मुझको अब जाने दो।