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9 May 2025 · 1 min read

गीत-सेना की सौगंध

सेना की सौगंध
सेना ने सौगंध उठाकर, अपने मन में ठाना है
भारत माँ को बचन दे दिया, पाकिस्तान मिटाना है

जब-जब पुष्प दिए तुमको, तुमने शूल बिखेरे हैं
जब भी तम को खोना चाहा, तुमने चुने अँधेरे हैं
बहुत हुए संवाद दया के, अब गीता ज्ञान सुनाना है।

अन्न दिया खाने को तुमको, और नीर भी पीने को
पर कश्मीर जुवां पर लाकर, आग लगा दी सीने को
खूब पिलाया पानी तुमको, अब भूँखे पेट सुलाना है

कितने सुहाग उजाड़े तुमने, अब उजड़े सिंदूर नही
पाकिस्तान नही होगा अब, शुभ अवसर यह दूर नही
दानवता के अंत समय तक, सिंदूरी मिशन चलाना है

सत्य, अहिंसा और दया का, सबको ज्ञान दिया हमने
हिंसा बोकर सकल विश्व में, इज्जत खोई है तुमने
धर्म पूछकर गलती कर दी, तुमको धर्म सिखाना है

सेना ने सौगंध उठाकर, अपने मन में ठाना है
भारत माँ को बचन दे दिया, पाकिस्तान मिटाना है
©®दुष्यंत ‘बाबा’

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