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8 May 2025 · 1 min read

मानती हूँ पर्वतों के ऋण बड़े हैं

मानती हूँ पर्वतों के ऋण बड़े हैं
पर तुम्हारे मान की खातिर ये तिनके भी लड़े हैं

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