सरोवर और सागर।
मैं सिमटी रही
तुम्हारे यादों संग
जैसे कोई सरोवर।
तुम भूल गए मुझे,
नदी सा बढ़ते रहे आगे,
फिर बन गए सागर।❤️
लक्ष्मी वर्मा ‘प्रतीक्षा’
मैं सिमटी रही
तुम्हारे यादों संग
जैसे कोई सरोवर।
तुम भूल गए मुझे,
नदी सा बढ़ते रहे आगे,
फिर बन गए सागर।❤️
लक्ष्मी वर्मा ‘प्रतीक्षा’