मेरे अल्फाज।
मेरे अल्फ़ाज़।
लिखा जब दिल का मैंने,
हर अल्फाज दर्द ही बोल रहा था।
लिखा ऐसा फसाना मैंने, जो दुनियाई सच खोल रहा था।
क्या कहूँ मैं अ दोस्त?जो कहा तेरे दिल ने,
वही दिल मेरा…
बोल रहा था।
जीवन के उलझे तार न सुलझाता कोई,
न कोई बुनता है।
उसकी झूठी खामोशी भी बोलती,
मेरे सच्चे अल्फाज भी न कोई सुनता है।
खुद के हाथ में पत्थर, दिल शीशे की दीवार है।
जिनके अलग शब्द, अलग व्यवहार है।
हर कदम प्यासा रहा, रहा प्यासा सफर सारा।
न जाने कैसी तकदीर जिंदगी की?
लिखा किसने भाग्य हमारा?
बनी इंतजार जिंदगी दिन-रात की।
ख्याबों में रोज तुमसे, मुलाकात की।
ख्याबों को हकीकत बना दो सनम,
ख्याबों ने ही तो जिंदगी की शुरआत की।
कुछ दर्द जिंदगी के यूं लग जाते हैं।
न भूले जाते,
न भुलाए जाते हैं।
कभी रुलाते,कभी सताते और पल-पल तड़पाएँ जाते हैं।
न होते बेगाने,
न बनते अपने,
रिश्ता दुश्मनों-सा निभाएं जाते हैं।
बना लाश जिंदगी को,
चिता पर जलाए जाते हैं।
दर्द जब देते इतना दर्द तो,
हम इन्हें क्यों पाए जाते हैं?
निंदक दूर राखिए,
आंगन से दूर भगाए।
पानी साबुन उसका उठा लियो,वो बदबू से मर जाए।
प्रिया प्रिंसेस पवाँर
स्वरचित, मौलिक
सूरज विहार,द्वारका,नई दिल्ली-78