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7 May 2025 · 1 min read

*सिंदूर हिंद का अभिमानी, सिंदूरी अब जयकारा है (मुक्तक)*

सिंदूर हिंद का अभिमानी, सिंदूरी अब जयकारा है (मुक्तक)
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सिंदूर हिंद का अभिमानी, सिंदूरी अब जयकारा है
लातों के भूतों के सिर से, भारत ने भूत उतारा है
भारत माता की जय कहते, सड़कों पर भारत के वासी
मंगल की रात हुआ मंगल, जय महावीर जय नारा है
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज) रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451

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