जय हिन्द की सेना
जय हिन्द की सेना
हम तो सहकर चुप रहे, बार-बार के तीर।
जब पानी हद से गया, तब रोका ये नीर।।
आतंकी इस खेल का, सोचा कब अंजाम
बढ़ चली सेना अपनी, सिंदूरी पैग़ाम।।
सूर्यकांत
जय हिन्द की सेना
हम तो सहकर चुप रहे, बार-बार के तीर।
जब पानी हद से गया, तब रोका ये नीर।।
आतंकी इस खेल का, सोचा कब अंजाम
बढ़ चली सेना अपनी, सिंदूरी पैग़ाम।।
सूर्यकांत