मुक्तक...
मुक्तक…
चार पैसे ले, फुदकने लगते हैं कौओं की तरह ,
क्यूँ समझते हैं वो, इंसानो को शोलों की तरह।
जिसने दी है ज़िन्दगी ,उसको कभी भूलो नहीं,
वो बचा लेता है ,जंगल में भी फूलों की तरह।
✍️नील रूहानी..
मुक्तक…
चार पैसे ले, फुदकने लगते हैं कौओं की तरह ,
क्यूँ समझते हैं वो, इंसानो को शोलों की तरह।
जिसने दी है ज़िन्दगी ,उसको कभी भूलो नहीं,
वो बचा लेता है ,जंगल में भी फूलों की तरह।
✍️नील रूहानी..