धोबी का कुत्ता - कुण्डलिया
छंद – कुण्डलिया
धोबी का कुत्ता सदा, भटके चारों ओर।
घर के रहें न घाट के, करता रहता शोर।।
करता रहता शोर, खुब दुम रहे हिलाता।
भरती ज्यों हीं पेट, बेवजह शोर मचाता।।
जैसे हो गुण गान, संग आलू में कोबी।
रहता लापरवाह, काम खोजे जब धोबी।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
सियारामपुर पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978