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5 May 2025 · 2 min read

सिन्दूर संग इंसाफ करो!

लोहे को बस लोहा काटे, फिर जहर से जहर को मरने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

जो बोया है वह काटोगे, यह कह दो कायर उन गद्दारों को,
छिप कर वार ये करते पाकी, मारते मुल्क के पहरेदारों को।
अब आँखों से न कोई आँसू उढेलो, क्रोध से उसे दहकने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

घर के भेदिये, छुपे भेड़िये, संग आतंकीयो को साफ करो,
रोती बिलखती माँ की आँचल, राखी, सिन्दूर संग इंसाफ करो।
हाथ खोल दो शस्त्रों वाले, चुन चुन अंतिम फैसला करने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

कल को छुआ था दामन इसने, पर आज ये बाजू काट गया,
धर्म पूछकर मज़हबी दीमक, देखी घर की चौखट चाट गया।
अब गला काट ले इससे पहले, जड़ से चिकित्सा करने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

जो कहते आतंक का कोई धर्म नहीं, उनको रस्ते पर लाएंगे,
खतना, कलमा पूछने वालों को, दोज़ख की गलियां दिखलायेंगे।
जन्नत कूच करने से पहले, उनको दीदारे मौत का करने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

आत्मघाती हमले के एवज, अब अपने सैनिकों को तैयार करो,
वह पहलगाम तक आ पहुँचे, तुम रावलपिंडी पर वार करो।
आवाम की अब है चाह पाक में, रक्त की दरिया बहने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

अब आंख के बदले आँख सही, अब सर के बदले सर होगा,
जब चिता जलेगी अपने घर, तो जद में उनका भी घर होगा।
अब तो केवल हुक्म करो, खड्ग, कृपाण, बन्दूक निकलने दो,
छोड़ो सियासती निंदा विंदा, अब सीने में गोली भरने दो।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०५/०५/२०२५)

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