जागो वीरो (विधाता छंद)
जागो वीरो
विधाता छंद 28
1222,1222,1222,1222
हमारे देश में आकर बड़ी दहशत मचाये हैं।
सिपाही नींद से जागो,मियां आतंक आये हैं।
पड़ोसी है भले अपना,मगर है नीच कायर भी।
चलाता दंभ की गाड़ी,लगे हैं बस्ट
टायर भी।
सनातन का विरोधी है, तभी कलमा पढ़ाये हैं।
सिपाही नींद से जागो,मियां आतंक आये हैं।
छिपे हैं मारकर गोली, कहाॅं पाताल में जाके।
इन्हें ढूंढों जहाॅं भी हों, भवानी की कसम खाके।
चुका दो खून का बदला, सभी आशा लगाए हैं।
सिपाही नींद से जागो मियां आतंक आये हैं।
बहा है खून बेटों का,दुखी माॅं भारती बोले।
बिछा दो पाक में जाके, प्रलय सम जंग के गोले।
बता दो हम शिवाजी को, मनाके प्रण उठाये हैं।
सिपाही नींद से जागो मियां आतंक आये हैं।
जगा दो देश को मोदी, व्यथित मन धीर अब खोदी ।
दनादन वार होने दो,पवन संदेश लाये हैं।
सिपाही नींद से जागो मियां आतंक आये हैं।
गुरु सक्सेना
मई 25