अम्बेडकर नगर की अनन्या
हाय री बेटी अनन्या तूने क्यों बेटी का जन्म लिया।
रक्षक ही भक्षक बन बैठे सर से छाया छीन लिया।।
तुझको तो साधू बनकर धर्म का ढोंग रचाना था।
अम्बेडकर नगर का त्याग जिला काशी में जन्माना था।।
झूठे वचन आडम्बर करके अन्धकार फैला देती।
आलीशान आश्रम होता कमरा भर नोट कमा लेती।।
तब तो सारे नेता झुककर तेरे चरणों में आ जाते।
बुल्डोजर तो दूर तुझे ही देवी का रूप बता जाते।।
तुझसे पहले भी एक बेटी बुझे दियों को टोहती थी।
मैला बदन फटे लत्तों से नंगा बदन लकोती थी।।
ऐसी ही अनगिनत हजारों कूड़े से अन्न उठाती हैं।
ऐसी भी अनगिनत हजारों ठोकर पै नोट उड़ती हैं ।
लेकिन तेरी तो जाति भी ओ० बी० सी ०में आती है।
प्रवचनो का अधिकार नही गद्दी भी धुलायी जाती है।।
पढ़ लिखकर प्रशासक बननाअनपढ़ों की ‘कर’जोरी है।
“मंगू सिहं” कानून चलावे अनपढ़ की मुहं जोरी है।।