अभी तकाज़ा वतन पे इतना
अभी तकाज़ा वतन पे इतना
है बोझ भारी कफन पे जितना
खबर न उनकी है अब न अपनी
बताओ दम है जतन पे कितना।।
सूर्यकांत
अभी तकाज़ा वतन पे इतना
है बोझ भारी कफन पे जितना
खबर न उनकी है अब न अपनी
बताओ दम है जतन पे कितना।।
सूर्यकांत