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4 May 2025 · 1 min read

अभी तकाज़ा वतन पे इतना

अभी तकाज़ा वतन पे इतना
है बोझ भारी कफन पे जितना
खबर न उनकी है अब न अपनी
बताओ दम है जतन पे कितना।।

सूर्यकांत

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