Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
4 May 2025 · 1 min read

सूर घनाक्षरी

विधा सूर घनाक्षरी
8,8,8,6 पर यति अनिवार्य है।
पदांत में 122( यगण) या 212 ( रगण ) रखा जा सकता है।

मन तरंग उठती,
तन झंकृत करती,
धुन मधुर बजती,
यादों की पुरानी।

बचपन की वो मस्ती,
खुशियाँ कितनी सस्ती,
बड़ी छोटी भले हस्ती,
उम्र थी सुहानी।

आयी अल्हड़ जवानी,
धार नदिया रवानी,
लिखी जीवन कहानी,
प्रीत की रुहानी।

चले जीवन सफर,
अब अंतिम पहर,
थोड़ी कठिन डगर,
खुशियाँ बुलानी।

सीमा शर्मा ‘अंशु’

Loading...