कब्र को कितना भी सजा लो, कोई लौटकर नहीं आता,
कब्र को कितना भी सजा लो, कोई लौटकर नहीं आता,
मिट्टी की इस चादर को कोई हटा नहीं पाता।
चिराग जलाओ लाख मगर, वो रौशनी नहीं लौटेगी,
जो गया है इस सफर में, फिर कभी आ नहीं पाता।
👑Kaviraaj-e-Hind✍️✍️