मुहब्बत कुल जहाँ को , जोड़ती है ,
मुहब्बत कुल जहाँ को , जोड़ती है ,
ये नफ़रत बस , दिलों को तोड़ती है,
अजी समझें, हक़ीक़त आप भी सब ,
हवा का ‘नील’, जब रुख़ मोड़ती है।
✍️नील रूहानी
मुहब्बत कुल जहाँ को , जोड़ती है ,
ये नफ़रत बस , दिलों को तोड़ती है,
अजी समझें, हक़ीक़त आप भी सब ,
हवा का ‘नील’, जब रुख़ मोड़ती है।
✍️नील रूहानी