पहलगाम का बदला। रचनाकार: अरविंद भारद्वाज
पहलगाम का बदला
दहशतगर्दों के जो प्रहरी, उनको सबक सिखाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
नापाक इरादे से इनके, निर्दोष लोग मारे जाते
फूलों की वादी में लोग ये, मासूमों का लहू बहाते
पहलगाम के हत्यारे, यमलोक हमें पहुँचाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
पहले भी दहशतगर्दों ने, देश में खून बहाया
उरी पुलवामा हमला करके, लोगो में डर फैलाया
सर्जिकल पहले वाली, फिर से हमको दोहराना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
बार-बार मुँह की खाकर, कायरता अपनी दिखाए
घुटने टेक कर भारत से, जान ये अपनी बचाए
मौत के उस सौदागर का, हमको घर भी ढ़हाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
छुप-छुप कर बैठे बंकर में, ये कायर जेहादी
अत्याचारी व नरभक्षी, खून-खराबे के आदी
ठोक के गोली माथे में, उनका खून बहाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
भारत की बढ़ती ताकत को, रोक सके ना कोई
सारे मुल्क है साथ हमारे, पाक ने इज्जत खोई
अन्तरिक्ष तक गूँज हमारी, जगत नें ये पहचाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
बुजदिल नेता पाक के, देते है गीदड़ भभकी
दशहतगर्द पीछे से उनको, देते रहते थपकी
अरविन्द लिखता एक हो जाओ, राष्ट्रप्रेम दिखलाना
उनके आकाओं को हमको, ढूँढ के मिट्टी मिलाना
(C) अरविन्द भारद्वाज