माता लो अवतार
धरती पर अब बढ़ गया दानव अत्याचार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
मानव दानव बन गया,करे पाप दिन रात।
भलमनसाहत भूलकर,करता गंदी बात।
दया धर्म को भूलकर,करता चोरी लूट।
घरवालों ने दे रखी, इनको पूरी छूट।
ले कटार निज हाथ में शत्रु को दो संहार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
आए दिन जग में मंदिर तोड़े जाते हैं।
तेरे भक्तों के माँ सर फोड़े जाते हैं।
जाति धर्म के नाम पर होतीं नित हत्याएँ।
हवसी के हाँथों लूटी जाती बालाएँ।
अपनी प्रिय प्रजा का लेने आओ प्रतिकार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
तेरी धरती पर दानव पैर पसार रहा।
घात लगाकर सब को आए दिन मार रहा।
सबसे जबरन कलमा पढ़वाया जाता है।
धर्म के नाम पर हमें डराया जाता है।
शत्रु का वध करने हेतु करो कटार प्रहार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
सत्य छोड़ नर ने असत्य को अपनाया है।
सकल धरा पर सर्वत्र अंधेरा छाया है।
चोरी हिंसा मानव का अब धर्म हुआ है।
मानव की दिनचर्या कुत्सित कर्म हुआ है।
जला ज्ञान का दीपक, जग में करो उजियार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
भाई ही भाई के हुआ खून का प्यासा।
शकुनी फेंक रहे हर दिन एक नया पासा।
लोभी नेता सब अपनी जेबें भरते हैं।
वोट बैंक की खातिर नित चालें चलते हैं।
घृणित सोच से इस जग का माँ करो उद्धार।
पाप मिटाने धरा पर माता लो अवतार।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)