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3 May 2025 · 1 min read

अंतिम संदेश

आईल खबरिया बेधले प्राण हो
काहे छोड़ दिहलु संसार जान हो
सोचल मनवा के बतिया हमार हो
काँच जईसे टूट गईल सजल संसार हो
बसत प्राण रहे तोहरा में जान हो
तोहरा बीना ई अधूरा अरमान हो
सपना चूर भईल काँच के समान हो
विपदा के टूटल बाड़े असमान हो
दोस्ती अधूरी छोड़ गईलू संसार में
केतना बताई तोहे चाहत रही सार में
तोहरा बिना जीवन भईल उदास हो
बहुते लोगन के रहलू हैं खास हो
आधे सफर में छोड़ दिहलू साथ हो
कईसे छूटल बोला हथवा से हाथ हो
रोवत बीते अब दिन अरुरी रात हो
कईसे होई सखी तोहरा से बात हो
अखियाँ में आँसू भरल दिल बे जान हो
तोहरे में बसे सखी हमरा प्राण हो

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