Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
5 May 2025 · 1 min read

मुक्तक

पहलगाम की घटना ने जो दर्द दिया वो गहरा है,
सताइस पर्यटक मार दिए देश ये फिर से ठहरा है।
हर आंसू का हिसाब मांगे आंखें पत्नी और मां बाप की,
जगाओ चोट से प्रधान सेवक बरसों से जो बहरा है।

— अशोक छाबड़ा

Loading...