मुक्तक
पहलगाम की घटना ने जो दर्द दिया वो गहरा है,
सताइस पर्यटक मार दिए देश ये फिर से ठहरा है।
हर आंसू का हिसाब मांगे आंखें पत्नी और मां बाप की,
जगाओ चोट से प्रधान सेवक बरसों से जो बहरा है।
— अशोक छाबड़ा
पहलगाम की घटना ने जो दर्द दिया वो गहरा है,
सताइस पर्यटक मार दिए देश ये फिर से ठहरा है।
हर आंसू का हिसाब मांगे आंखें पत्नी और मां बाप की,
जगाओ चोट से प्रधान सेवक बरसों से जो बहरा है।
— अशोक छाबड़ा