वतन के लिए सर कटा कर चले है
किया वादा वो निभा कर चले हैं
वतन के लिए सर कटा कर चले हैं
दुखों का कमी कब रहा है जिंदगी में
तो भी हम सदा मुस्कुरा कर चले हैं
दुश्मन भले ही समझ ले हमें हां
तिरी राह का कांटा उठाकर चले हैं।
जमाने की बातों पे ना कान धरते
वो आशा के दीपक जलाकर कर चले हैं
ना मांगे उधारी कभी उनसे कोई
यूं चहरा वो अपना बना कर चले हैं
नूर फातिमा खातून नूरी
जनपद -कुशीनगर