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2 May 2025 · 1 min read

वतन के लिए सर कटा कर चले है

किया वादा वो निभा कर चले हैं
वतन के लिए सर कटा कर चले हैं

दुखों का कमी कब रहा है जिंदगी में
तो भी हम सदा मुस्कुरा कर चले हैं

दुश्मन भले ही समझ ले हमें हां
तिरी राह का कांटा उठाकर चले हैं।

जमाने की बातों पे ना कान धरते
वो आशा के दीपक जलाकर कर चले हैं

ना मांगे उधारी कभी उनसे कोई
यूं चहरा वो अपना बना कर चले हैं

नूर फातिमा खातून नूरी
जनपद -कुशीनगर

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