अंतिम निर्णय युद्ध तभी।
युद्ध क्रोध से तय न करेंगे, न तैश में रार को ठानेंगे।
शांत हृदय से सोच समझ, कुत्सिक वार को टालेंगे।।
लड़ भिड़ना समाधान नही, न इससे समस्या हल होगा।
मार्ग शांति का चुनने वाला, दुर्बल नही सबल होगा।।
उकसावे में आने वाला, वह समझदार व्यक्तिव नहीं।
शांति के आगे युद्व की बातों, का कोई अस्तित्व नही।।
टाल सके जो युद्ध घोषणा, वह राजनीतिज्ञ सफल होते।
अंतिम निर्णय युद्ध तभी, जब शांतिवार्ता बिफल होते।।
समझाने से भी न समझे, गर कामी क्रोधी मगरूरी है।
नासूर बने चुभे खील अगर, तो होना उपचार जरूरी है।।
फिर मार-काट कर तार-तार, ऐसा बीभत्स नज़ारा हो।
कांप उठे सुन युद्ध के चर्चे, जो भी उसका दुलारा हो।।
©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०२/०५/२०२५)