तड़प
गर चोट ठोकरों से खाई
तो गिरकर सम्भल जाओगे
चोट दिल पर आई
फिर किधर जाओगे
न विश्वास करो यारों
दिल के मेहमां पर
दिल लगाकर तोड़ा
तो तड़प जाओगे
लौट जाते हैं सावन भी
पतझड़ के आते ही
संगदिल से तुम
क्या ही आस लगाओगे
और रह जाते हैं लोग
समंदर किनारे भी प्यासे
तुम्हें क्या लगता है
तुम इनसे क्या पाओगे?
तोड़ा जो तुमको
कुछ बिखरोगे इस तरह
जीवन में कभी भी न
सम्भल पाओगे….