इक परिंदा पालें तो कैसा रहे
इक परिंदा पालें तो कैसा रहे
शाख़ पर बिठा लें तो कैसा रहे
चुग सके दाने वो चैन सुकून से
बोझ ये उठा लें तो कैसा रहे
इक परिंदा पालें तो कैसा रहे
शाख़ पर बिठा लें तो कैसा रहे
चुग सके दाने वो चैन सुकून से
बोझ ये उठा लें तो कैसा रहे