*मनः संवाद----*
मनः संवाद—-
02/04/2025
मन दण्डक — नव प्रस्तारित मात्रिक (38 मात्रा)
यति– (14,13,11) पदांत– Sl
जिनको भी आगे जाना, वर्तमान से युद्ध कर, हो भविष्य निर्माण।
जीवन संघर्ष माँगता, सभी स्वप्न साकार हों तब हर्षित हो प्राण।।
नित्य निशाने पर रत रह, लक्ष्य पूर्ण अभ्यास कर, जब तक अंतिम बाण।
चिंता मत कर चिंतन कर, एक सूत्र यह याद रख, रहना नित क्रियमाण।।
मिलते सारे दृश्य नये, ज्यों ज्यों बढ़ता है अधिक, मिलते हैं नवरंग।
कल जिनको हँसते देखा, आज अभी वह रो रहा, होता त्रस्त पलंग।।
गीत खुशी के गाता है, बंजारे के धुन नये, चला बजाता चंग।
महा पहेली जीवन को, कौन कहाँ सुलझा सका, सबकी बुद्धि तंग।।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य, (बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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