हूँ बे-ख़बर कि बा-ख़बर
हूँ बे-ख़बर कि बा-ख़बर
ये आवाज़ कैसी है…..
कहा-तन्हाइयों से तू
मेरे दिलदार जैसी है…
कभी पनघट पर आना तुम
मेरे इक श्याम के ख़ातिर
तुम्हारी गीत से जो प्रीत मेरी
मीरा के प्यास जैसी है…!!
✍🏻 शुभम आनंद मनमीत
हूँ बे-ख़बर कि बा-ख़बर
ये आवाज़ कैसी है…..
कहा-तन्हाइयों से तू
मेरे दिलदार जैसी है…
कभी पनघट पर आना तुम
मेरे इक श्याम के ख़ातिर
तुम्हारी गीत से जो प्रीत मेरी
मीरा के प्यास जैसी है…!!
✍🏻 शुभम आनंद मनमीत