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1 May 2025 · 2 min read

विश्व श्रमिक दिवस

#विश्व_श्रमिक_दिवस पर कुछ ख़ास,,,,🥰
दिनांक, 01/05/2025,,,
#नज़्म ,,,,
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
💖
उनवान ,,,, #मज़दूर और #सभा ,,,
~~~~~~~~~~~~
कई बरस पहले ,,
बड़े शहरों की बड़ी बड़ी इमारतें ,
कैसे बनेगी , मशीन खुद तो न चलेंगी ,
बस , विचार आया , और लगे कहने ,
आओ आओ , यहां काम है , बहुत काम है ,
पैसा भी मिलेगा , और खाना भी मिलेगा ,
इतना सुनते ही , चल दिए मेहनत को ,
कुछ तन्हा , कुछ परिवार लिए ,,
करने लगे , मेहनत मजदूरी ,
मगर कौन समझे , उनकी मजबूरी ,
जिस गांव से आए , कर्ज़ा सर पर रख कर ,
बोझ बना सारा का सारा अपने कांधों पर ,
गुज़रा समय , बीते माह ,,
खाना तो मिल जाता ,, कर्ज़ अदा हो कैसे ,
मालिक से मांगे, टर्राटा ,
रोब जमाता ,
क्या क्या न कह जाता ,,
झुग्गी, झोपड़ी ,जीवन हुआ ,
कर्ज़ अदा न हुआ ,
बचे खेत भी चले गए ,,
आंसू पोछे अपने ,
जैसे तैसे मेहनत की फिर ,
कोरोना ने घेरा ,
काम धाम सब बंद हुआ जब ,
मालिक ने धिक्कारा ,
छीना घर , छीना अधिकार ,
चला जा अपने , फिर से गांव,,
क्या करता बेचारा , चला गांव की ओर ,
पैरों में छाले लेकर , गोदी में नन्हा चितचोर ,
भूख से , कितने लुड़क गए ,
नंगे पांव , जब चले मजदूर ,
आँखें रोती , पैर भी रोते ,
मगर न रोए , कोई अमीर ,
देखा इनका , कैसा ज़मीर ,
प्रकृति की फिर सभा ने ,
लिया जो बदला ,
लाशों के फिर ढेर ,,
तरस न आया , डॉक्टर को भी ,
भर लीं जेबें , ढेर की ढेर ,,,
कोई भी , अनजान न इससे ,,,
कैसी सभा , कैसे खेल ,,,
भूल न पाए , कोई मानस ,,
रचा गया , फिर ये परिवेश ,
टूटे मन से , लिखी सभा ये ,
“नील” ने देखे , कुछ ऐसे खेल ,
फिर वापस , आए मज़दूर,
सबक़ , मगर न भूले ,
शिक्षा देने लगे , बच्चों को ,
खुद करके , मज़दूरी,
उज्ज्वल भविष्य , बनेगा ,
बच्चों , और मजदूरों का ,
समय , बदलता सबका ,
समय बड़ा बलवान ….
समय बड़ा बलवान ….
मज़दूर , जिंदाबाद !
मजदूर , ज़िंदाबाद !!

✍️नील रूहानी,,,,, 01/05/2025,,,,,,,,,,,,,,🥰
( नीलोफर खान )

1886 की हायमार्केट घटना

इस घटना ने पूरी दुनिया के मजदूरों को झकझोर दिया। इसके बाद 1889 में पेरिस में हुए अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में यह फैसला लिया गया कि 1 मई को “अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस” के रूप में मनाया जाएगा,
#ताकि_मजदूरों_के_संघर्ष_और_बलिदान_को_याद_किया_जा_सके।

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