हम हैं मेहनतकश मजदूर
कभी विषम हालातों में भी, नहीं होते हैं हम मजबूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
अपनी कड़ी मेहनत से हम, खेतों में फसल उगाते हैं।
दिनभर खटकर कड़ी धूप में, फावड़ा कुदाल चलाते हैं।
रात-रात खेतों में जगकर,जब हम निगरानी करते हैं।
कहीं अन्न तब घर आता है, अपने पेटों को भरते हैं।
काम खत्म कर ही घर आएँ,भले थककर हो जाएँ चूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
पत्थर पर पत्थर रख करके, सुन्दर इमारत बनाते हैं।
निर्धन हो या पैसे वाला,सभी के सपने सजाते हैं।
निज भूख मिटाने की खातिर,सारा-सारा दिन हम खटते।
मेहनताना उचित न मिलता,हम भूखे पेट सदा सोते।
काम के बदले धन माँगते,निज मेहनत पर हमें गुरूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
हमनें घर, तालाब बनाए, मन्दिर, मस्जिद आकार दिया।
काट पहाड़ों को हमनें ही,हर सपनें को साकार किया।
हमारी मेहनत के दम पर, विकसित भारत देश हुआ है।
हमारे बनाए यानों से, लोगों ने अंतरिक्ष छुआ है।
हमारी बनाई चीजों से, क्यों? करते हो हमें ही दूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
सड़क निर्माण करके हमनें, यात्रा को सुगम बनाया है।
पुल, रेलवे स्टेशन बनाकर, सबके समय को बचाया है।
कल कारखानों में रात दिन,जब काम श्रमिक हम करते हैं।
तब कहीं जाके आप सबको, पहनने को वस्त्र मिलते हैं।
हर क्षेत्र में काम करते हैं, कहते हो नहीं हमें सहूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
कड़ी मेहनत करने पर भी, नहीं उचित पैसे मिलते हैं।
फिर भी हम सब अपना कार्य, कड़ी मेहनत से करते हैं।
चाहे कितनी धूप कड़ी हो, तन में भले पड़े हों छाले।
जब तक रवि अस्त नहीं होता, नहीं काम से हटने वाले।
चावल रोटी दाल चाहिए, नहीं चाहिए हमें अंगूर।
हम हैं मेहनतकश मजदूर,हम हैं मेहनतकश मजदूर।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)