योगी, स्वामी, बने पथदर्शक।
योगी, स्वामी, बने पथदर्शक।
न बनें मोह के केवल अंशक।।
सच्ची साधना फिर होवे।
मन का आकाश पुनः खोले।।
-आचार्य शीलक राम
योगी, स्वामी, बने पथदर्शक।
न बनें मोह के केवल अंशक।।
सच्ची साधना फिर होवे।
मन का आकाश पुनः खोले।।
-आचार्य शीलक राम