मैं
मैं कौन हूँ?
शायद अब तक खुद से ही अनजान हूँ।
वो हूँ, जो कभी था नहीं — और जो बन रहा हूँ।
मैं क्यों रुक गया?
ताकि गिरने से पहले सँभल सकूँ,
थोड़ा खुद को महसूस कर सकूँ।
मैं क्यों दुखी हूँ?
शायद खुद को अंधेरों से तौल लिया,
अपनी गलतियों और कमियों को ही ज़िंदगी मान लिया।
मैं क्यों शांत हूँ?
अंदर की आग को जलाने के लिए,
नए कल के नए ‘मैं’ की तलाश के लिए।
मेरा कल?
आज से बेहतर होगा,
बस खुद को… खुद से जीतना होगा।
क्या मैं खुद को पा लूँगा?
ज़रूर —
नफ़रत को मोहब्बत बनाकर,
कमज़ोरी को हौसला बनाकर,
और सवालों को जवाब बनाकर।
— यश सोनी