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1 May 2025 · 1 min read

दो मुक्तक

माथे पर सबके लिखी, क्या किसकी तकदीर।
रेखाओं के जाल में, उलझी क्यों तस्वीर।।
राजा, रंक, फकीर की, एक यहां पर चाल।
सांसों के महताज हैं, क्या सरगम क्या ताल।।

2
सूखे फूल गुलाब के, भीगी यादें मौन।
मोर पंख ताज़ा हरा, अब बतलाए कौन।।
बदल गया लिबास सब, बदल गई अब चाल।
दाने यथा अनार के, बिखरे-बिखरे लाल।।

सूर्यकांत

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