याद है खुशी के पल
याद है खुशी के पल जब साथ थे हम तुम
बाहों में बाहें डाले , हम इक दूजे में गुम।
रोज़ मिलना और बिछड़ना,कैसा था मौसम
नयी उमंग,नयी तरंग, साथ रहने की कसम।
आज तन्हा हूं तो ,मैं यही सोचता फिरू
क्यों आखिर क्यों ,आज जुदा है हम।
कड़वे नीम तले , मीठी नज्मों को लिखना
याद आए हैं आज भी ,तेरी पायल की छम-छम।
मिले थे मुझे तो मिल भी गये होते तुम
बिछड़े हो तो लगे ,निकल न जाए कहीं दम।
सुरिंदर कौर