सहम रहे कब वीर है,लखे सामने काल।
सहम रहे कब वीर है,लखे सामने काल।
खींच चले वो लीख को, शिकन मुक्त ले भाल।।
बतलाके जो गोत्र को, खोज रहे सम्मान।
तेजस्वी वो है नहीं, उनको खग तू जान।।
संजय निराला
सहम रहे कब वीर है,लखे सामने काल।
खींच चले वो लीख को, शिकन मुक्त ले भाल।।
बतलाके जो गोत्र को, खोज रहे सम्मान।
तेजस्वी वो है नहीं, उनको खग तू जान।।
संजय निराला