बोलने की आजादी की सीमा
सिंहावलोकन घनाछरी छंद
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राज न है आती लाज करते जो भितर घात,
ऐसे देश द्रोहियों को इस देश से भगाइए।
भगाइए ना काम है उनका इस देश में,
डालके दो चार केस उन पर रासुका लगाइए।
लगाइए पाबंदी उनकी इस बद जुबान पर,
बोलने की आजादी की सीमा भी तो बताइए।
बताइए कि अब न गलेगी दाल इस तरह,
तुमको भी मौका है 72 हूरौं से मिल आइए।।
~राजकुमार पाल (राज) ✍🏻
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)