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14 Mar 2025 · 1 min read

खुशियाँ मिले या ग़म मिले , बाँट रहा दरबार ।

खुशियाँ मिले या ग़म मिले , बाँट रहा दरबार ।
सोच में अब डूबा पथिक , क्या पाए इस बार ।।
✍️नील रूहानी..

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