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8 Mar 2025 · 1 min read

नारी तुम्हारी समझ

नारी तुम्हारी समझ सब पर भारी
जो समझा उसके घर खुशहाली
जो नहीं समझा उसके घर तंगहाली
तुम हो खुशियों की थाली
इसलिए हो घर की मलकानी।।

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