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10 Jan 2025 · 1 min read

जब तक मचा हो अन्दर कशमकश

जब तक मचा हो अन्दर कशमकश
कोई तो कुछ कह भी नहीं सकता
जिंदगी से दो-चार हाथ किए बिना
ऐसे कोई कहीं जा भी नहीं सकता

पारस नाथ झा

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