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27 Oct 2024 · 1 min read

#मुक्तक-

#मुक्तक-
■ फुर्सत का आख़िरी दिन।
[प्रणय प्रभात]
ताल, सुर, लय सभी नदारद हैं,
बेसबब सी ये ता-ता, धिन-धिन है।
कल को मसरूफ़ियत से मिलना है,
आज फुर्सत का आख़िरी दिन है।।
😊😊😊😊😊😊😊😊😊
-सम्पादक-
●न्यूज़&व्यूज़●
(मध्य-प्रदेश)

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