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12 Oct 2024 · 1 min read

दर्द ए गम था उसका, ग़ज़ल कह दिया हमने।

दर्द ए गम था उसका, ग़ज़ल कह दिया हमने।
इस तरह संजीदगी पर, फ़ज़ल किया हमने।।

खुद्दारी वफादारी की कीमत ही घटा दी हमने।
इस तरह इंसानियत का कतल किया हमने। ।।

“शून्य”

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