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28 May 2024 · 1 min read

वफ़ा और बेवफाई

वफ़ा और बेवफाई
की बहस से परे,
मोहब्बत की उबड़ खाबड़
तंग गालियों के
लंबे सफ़र के बाद
चाही अनचाही शिकवे शिकायतों
की लंबी फ़ेहरिस्त से रूबरू होते
इश्क़ की शाम ढल ही गई
वो खुश है इसलिये मैं भी खुश हूँ
फ़िर भी..
खबर है मुझे
गुज़रते वक़्त के साथ
विगत के मलिन होते पन्नो पर
जब नजर जाएगी
तो अफ़सोस ज़रूर होगा
उनको भी, और शायद मुझे भी
वज़ह बेशक जुदा जुदा हों

हिमांशु Kulshrestha

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