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28 May 2024 · 1 min read

आनंद (सुक़ून) वाह्यलोक नही, अंतर्मन का वासी है।”

आनंद (सुक़ून) वाह्यलोक नही, अंतर्मन का वासी है।”
उसे बाहर नहीं भीतर खोजें।

😊प्रणय प्रभात😊

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