Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
28 May 2024 · 1 min read

मौत

दोस्तों,

एक मौलिक ग़ज़ल आप सभी की मुहब्बतों के हवाले,,,,,!!!

ग़ज़ल
=====

मौत

मौत जगह और समय का इंतजार करती है
ले जाती नही तब तक हम से प्यार करती है।
===========================

है अटल सच कोई झुठला न सकता इसको,
छू भी न सकती जिस से वो करार करती है।
===========================

ये मौत है जो वक्त से पहले दगा न करती है,
वरना ये दहर तो हम पे हरबार वार करती है।
===========================

मौज-मस्तियाँ तब-तक, जब-तक है जिंदगी,
है जिंदा,हयात मुहब्बत का इजहार करती है।
===========================

धड़कने,धमनियाँ, नफ़्स और बहती शिराऐं,
सब हर दम काया से बेदर्द तकरार करती है।
===========================

उफ्फ़ ये मौत शायर “जैदि” कितनी सत्य है,
समय से पहले सभी को दरकिनार करती है।
===========================

मायने:-
करार:-समझोता
दहर:-दुनिया
हयात:-जिंदगी
नफ़्स:-सांस

शायर:-“जैदि”
डॉ.एल.सी.जैदिया “जैदि”

Loading...