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28 May 2024 · 1 min read

44...Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a

44…Ramal musamman maKHbuun mahzuuf maqtuu.a
faa’ilaatun fa’ilaatun fa’ilaatun fe’lun::2122 1122 1122 22
दर्द का दर्द से जब, रिश्ता बना लेता हूं
इस बहाने सभी को, अपना बना लेता हूं
@
ख़ास कुछ लोग मुकर जाते, बातों से अपनी
आदमी जान, अलग रस्ता बना लेता हूं
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मज़हबी दौड़ जहाँ ,मुल्क करे क्या हासिल
खौफ की सोच, धमाका सा बना लेता हूं
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धूप में ढूढ़ रहा, साया किसी बरगद का
छाँव तारीफ पसंदीदा बना लेता हूं
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रंज फूलों से मुझे, खुशबू का हूँ परहेजी
बारहा याद का, बागीचा बना लेता हूँ
@
क्या बहलता ही नहीं आपे जमाना बाहर
देर कुछ सोच के, घारोबा बना लेता हूँ
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लूँ पहन बीच में आजादी का खादी कुरता
इस हकीकत के लिए, चरखा बना लेता हूँ
देखे जब जाते नहीं कुछ दुविधा के मंजर
औऱ नीयत का नया चस्मा बना लेता हूँ
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर
जोन 1 स्ट्रीट 3 दुर्ग छत्तीसगढ़
26.3.24

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