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28 May 2024 · 1 min read

*इक क़ता*,,

इक क़ता,,
😊
देश बचाने की खातिर, हमने भी जान गँवायी थी,
लाल चुनरिया छीन सफेदी सर पर कई उढ़ायी थी ।
भूल न जाना लहू हमारा ‘नील’ बहाया था हमने ,
क़ुर्बानी देकर अपनी कितनों की जान बचायी थी ।

✍नील रूहानी ,, 28/05/2023 ,,,
( नीलोफ़र खान ,, स्वरचित )

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