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27 May 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

ग़ज़ल = (17)
बह्र __1222 1222 1222 1222 ,
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
क़ाफिया _ एरा // रदीफ़ _ क्यों नहीं होता,
***********************************
ग़ज़ल
1,,
मेरे आंगन में पहले सा ,सवेरा क्यों नहीं होता,
जो रहता था परिंदों का,बसेरा क्यों नहीं होता।
2,,
वो मेहमानों का आना,शोर करना बच्चे बच्चे का,
वहीं अब दरमियां परियों का फेरा क्यों नहीं होता।
3,,
न किलकारी है नन्हों की, न गुस्सा डांट नानी की,
तेरा ननिहाल पहले सा , तेरा क्यों नहीं होता ।
4,,
मुहल्ले में जमा होकर करें तूफान सब साथी ,
कहां खोया है बचपन, वो मेरा क्यों नहीं होता।
5,,
सभी फिक्रों में दिखते “नील”सबसे पूछते रहते ,
हमारे घर कभी खुशियों का डेरा क्यों नहीं होता ।

✍️नील रूहानी ,,, 23/05/2024,,,,,,,🥰
(नीलोफर खान, स्वरचित )

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