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27 May 2024 · 1 min read

कुलदीप बनो तुम

सुन लो सुन लो जरा ऐ मेरे दोस्तों,
जिंदगी को सजा लो सदाचार से ।

वीर बनो तुम धीर बनो तुम,
उदधि जैसे मन से गंभीर बनो तुम ।

पर्वत जैसे तुम भी ऊंचाई ले आओ,
अनंत आकाश की परछाईं ले आओ।

नदी, वृक्ष जैसे परोपकारी बनो तुम,
मन में रख दया का भाव आज्ञाकारी बनो तुम।

मात- पिता के श्रवनकुमार बनो ,
गोविंद से भी गुरु का सम्मान करो तुम।

एक ऐसी प्रज्वल्यमान दीप बनो तुम,
कृपासिंधु, पुरुषोत्तम ,कुलदीप बनो तुम।

अनामिका तिवारी” अन्नपूर्णा “✍️✍️

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