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27 May 2024 · 1 min read

साजे दिल तोड़ के आवाज़ की बातें न करो

साजे दिल तोड़ के आवाज़ की बातें न करो
आसमां छीन के परवाज़ की बातें न करो
डूबती शाम को तारों का दिलासा देकर
चांद के छल भरे अंदाज की बातें न करो
महफ़िलें भी हैं तमाशे भी रौनकें भी बहुत
पर किसी से भी यहाँ राज की बातें न करो
सुन तो सकते हैं मगर कहने में ये ध्यान रहे
इस भरी दुनिया में हमराज़ की बातें न करो
जो मिली थी उसे अंजाम से मिलवाने के बाद
अब नयी जींद के आगाज की बातें न करो
तन्हा सन्नाटों में गीतों के समा जाने के बाद
तार टूटे हों तो हमसाज की बातें न करो

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