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27 May 2024 · 1 min read

पुरवाई

पुरवाई–
चौपाई छंदगीत–
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१-कृष्ण कन्हैया पकड़ कलैया।
यमुना तट पर वेणु बजैया।।
नटखट कान्हा वो गोपाला।
नाच नचाए नित ब्रजबाला ।।

२-रात शरद पूनम की आई।
धीरे धीरे चल पुरवाई।।
भानु किशोरी भोली राधा।
राधा बिन मोहन है आधा।।

३- चाँद खिला है दिव्य सुहाना।
वेणु बाजी गूँजा तराना।।
रसिया मोहन रास सजीला।
रसिक युगलवर छैल छबीला ।।

४- यमुना तट शुचि रास रचाए।
गोपी जन वल्लभ मुस्काए।।
जन्म-जन्म की प्रीति निभाए।
उर आनंद तरंग समाए।।

‌५- गोपी कान्हा छम छम नाचें।
ध्वनि नुपूर सुर पुर में राचें।।
शंकर साड़ी पहनें आये।
शिवशम्भु गोपीश कहलाये।।

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✍️ सीमा गर्ग मंजरी
मौलिक सृजन
मेरठ कैंट उत्तर प्रदेश।

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