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26 May 2024 · 1 min read

एक सरल मन लिए, प्रेम के द्वार हम।

एक सरल मन लिए, प्रेम के द्वार हम।
कुछ अधूरे वचन, सौंपकर आ गए।।

कि राह में छोड़कर, तुम चले तो गए,
रास्ता पर हमें, पूर्ण करना तो था,
जिसके जीवन का कोई न आधार था,
उसकी जीवन कहानी बनानी तो थी।

इस तरह प्रेम को, ढूंढकर खो गए।
स्वप्न को छोड़कर, लौटकर आ गए।।

एक सरल मन लिए, प्रेम के द्वार हम।
कुछ अधूरे वचन, सौंपकर आ गए।।

अभिषेक सोनी
ललितपर, उत्तर–प्रदेश

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