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25 May 2024 · 1 min read

पलकों में शबाब रखता हूँ।

पलकों में शबाब रखता हूँ।
हाथों में गुलाब रखता हूँ।
चुरा न ले कोई ख़्वाबों को –
ख़्वाबों पे नकाब रखता हूँ।

सुशील सरना

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